देशव्यापी कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान शासन से लेकर प्रशासन के कई मानवीय रूप देखने को मिले हैं। अभी हाल ही में एक ऐसा ही किस्सा हुआ है, जब प्रधानमंत्री कार्यालय, पोस्टल विभाग और पुलिस प्रशासन 1000 किलोमीटर से ज्यादा दूर एक किडनी की बीमारी से पीड़ित महिला मरीज की दवाई पहुंचाने में जुट गए।
इस घटना की रिपोर्ट स्मृति ईरानी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर साझा की है।
All hands on deck @PMOIndia 🙏 pic.twitter.com/cMnI8ieYhY
— Smriti Z Irani (@smritiirani) May 7, 2020
मुम्बई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के लोखंडवाला निवासी, 62 वर्षीय रेनू श्रीवास्तव पिछले 16 सालों से किडनी की बीमारी के लिए दिल्ली के एक स्पेशलिस्ट डॉक्टर से दवाई ले रही थी। पिछले महीने लॉकडाउन की वजह से डॉक्टर उन्हें दवाई नहीं भेज पाए। पत्नी की तबियत के बारे में चिंतित पति दिनेश श्रीवास्तव ने इस संबंध में 15 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को एक ईमेल लिखा।
इस बात पर महिला ने अपने पति से हँसते हुए कहा, “इस वक़्त प्रधानमंत्री और उनकी टीम के पास काम करने के लिए और भी महत्वपूर्ण कार्य हैं। मुझे संदेह था कि किसी ने भी मेल नहीं पढ़ा होगा।”
“लेकिन तीन दिन बाद उन्हें दिल्ली से एक फोन आया। फोन पर कोई सहायक पुलिस निरीक्षक थे। जिन्होंने बताया कि मेल में जिस डॉक्टर का नाम लिखा है, उनसे बात हो गई है और कल हमारा एक अधिकारी उनसे दवाई ले लेगा” महिला ने मुंबई मिरर को बताया।
अगले ही दिन दवाई का पैकज दिल्ली से भेज दी गया और बाकायदा उनके पति को व्हाट्सएप्प पर बिल भी भेजा गया। इस बीच वे स्थानीय पोस्टमास्टर के संपर्क में भी थे, जिन्होंने उन्हें दवाई पहुंचने की सूचना दी। आखिरकार उनकी दवाई 22 अप्रैल को उनके पास पहुंच गई।
उन्होंने पीएमओ से लेकर पुलिस और डाक कर्मचारी सभी लोगों का आभार जताया। खासकर की पुलिसकर्मी का जिन्होंने दवा के पैसे लेने से भी इनकार कर दिया। इस पर महिला ने कहा कि “उन्होंने हमसे या फिर डॉक्टर से दवाई के रुपये नहीं लिए। हालांकि, दवाई की कीमत केवल 100 रुपये थी, लेकिन उनका यह भाव हमारे लिए लाखों का था।” उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि किस तरह देश के सर्वोच्च कार्यालय (PMO) में आम जनता द्वारा भेजे गए मेल को पढ़ा जा रहा है, और साथ ही उनका जवाब भी दिया जा रहा है।