“माफ करना मजदूर भी हूं और मजबूर भी “, साइकिल चुराने पर प्रवासी मजदूर ने मालिक को पत्र लिखा

Migrant worker steals Cycle and leaves sorry letter for owner

कोरोना महामारी से बचने के लिए सरकार ने 17 मई तक देशव्यापी लॉकडाउन किया हुआ है। इस लॉकडाउन के बावजूद भी देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर दिन देशभर में लगभग 3000 से ऊपर मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पूरे देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 85 हजार को पार कर चुकी है। वहीं इस लॉकडाउन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से कई अजीबोगरीब खबरें सामने आ रही हैं।

कोरोना लॉकडाउन में हर प्रवासी मजदूर किसी तरह अपने घर पहुंचने की कोशिश कर रहा है। भीषण गर्मी में लोग सड़कों पर या तो पैदल या साइकिल से जा रहे हैं।ऐसे ही एक प्रवासी मजदूर मोहम्मद इकबाल राजस्थान के भरतपुर से 250 किलोमीटर की दूरी तय कर यूपी के बरेली पहुंचा । लेकिन वो यहां तक चुराई हुई साइकिल से पहुंचा। इतनी लंबी दूरी को तय करने के लिए उसने अपने मालिक की साइकिल चुराई।

  लेकिन दिलचस्प बात यह है कि मजदूर ने साइकिल चुराते वक्त अपने मालिक के नाम एक पत्र लिखा। जब मालिक साहब सिंह बरामदे की सफाई कर रहे थे तब उन्हें ये पत्र मिला। पत्र में, इकबाल ने लिखा, पत्र में इकबाल ने लिखा, ‘मैं मजदूर हूं , मजबूर भी। मैं आपका गुनहगार हूं। आपकी साइकिल लेकर जा रहूं। मुझे माफ कर देना। मुझे बरेली तक जाना है। मेरे पास कोई साधन नहीं है और दिव्यांग बच्चा है। ’  माफीनामे में उसने यह भी लिखा है कि उसका एक बच्चा है जो कि दिव्यांग है और वह चल नहीं सकता। उसी के लिए उसे ऐसा करना पड़ रहा है। इकबाल ने इस चिट्ठी में अपना अपराध स्वीकार किया है। 

टीवी पत्रकार शिव अरूर ने मजदूर का पत्र अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है:

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