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टीचर की नौकरी छोड़कर जंगल बचाने निकला पहाड़ का ये युवा, अबतक लगाए 40 हजार से ज्यादा पेड़

अक्सर सोशल मीडिया पर आपको पर्यावरण संरक्षण का ज्ञान देने वाले बहुत सारे लोग मिलेंगे, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो उसे अपनी असल जिंदगी में उतारते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं उत्तराखंड के चंदन नयाल(Chandan Nayal)। यहां तक कि उन्होंने अपनी टीचर की नौकरी छोड़कर अपना पूरा जीवन पर्यावरण को समर्पित कर दिया है। सबसे खास बात तो यह है कि चंदन अब तक 40 हजार से ज्यादा पेड़ लगा चुके हैं।

28 वर्षीय चंदन नयाल उत्तराखंड के नैनीताल जिले (Nainital) के ओखलकांडा ब्लॉक के दुर्गम गांव नाई के तोपचामा के निवासी हैं। चंदन नयाल ने WeUttarakhand मीडिया को बताया कि वह मूल रूप से एक किसान परिवार से हैं। गांव में शिक्षा संशाधनों की कमी के चलते वे अपने चाचा के साथ नैनीताल आ गए थे। जहां हरगोविंद सुयाल इंटर कॉलेज से उन्होंने अपनी 12वीं की शिक्षा पूरी की। फिर उन्होंने लोहाघाट से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। कुछ समय तक वे रूद्रपुर के एक सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में शिक्षक के तौर पर भी सेवारत रहे।

हालांकि, मैदान की सुख-सुविधा हर किसी आदमी की अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। लेकिन चंदन को ये सुख-सुविधाएं ज्यादा दिन तक नहीं भायी। वे नौकरी छोड़कर वापस अपने गांव लौट गए। चंदन ने बताया कि उनके गाँव के आस-पास चीड़ का काफी बड़ा जंगल है, जिसमें हर साल आग लगने से गांव वालों के साथ साथ पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंचता था। इसलिए उन्होंने गांव के लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया और आस-पास बांज और बुरांश के पेड़ लगाना शुरू किया।

Chandan Nayal from Nainital planted more than 40 thousand at the age of 28

उन्होंने बताया कि चौड़ी पत्ती के वृक्ष जैसे बांज-बुरांश के पेड़ों का पौधरोपण इसलिए किया क्योंकि ये वृक्ष भूस्खलन रोकने और जल सरंक्षण में मददगार होते हैं। आज उनके गांव के आसपास करीब 15 हजार पेड़ों का जंगल है। साथ ही उन्होंने जगंलों में चाल-खाल बनाए। जिससे बारिश और झरनों का पानी इनमें रुके। फायर सीजन के दौरान जंगल की आग को रोकने और बुझाने में यह चाल-खाल कारगर साबित होते हैं।

मात्र 28 साल की उम्र में 40 हजार से ज्यादा पेड़ लगाने का चंदन नयाल का सफर इतना भी आसान नहीं रहा। यहां तक की कुछ लोग उन्हें पागल भी कहने लगे। जब वह पौधरोपण के लिए वन विभाग के पास जाते तो उन्हें सिर्फ 10-20 पौधे देकर टरका दिया जाता था। मगर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार कार्यरत रहे।

Chandan Nayal from Nainital planted more than 40 thousand at the age of 28

आज चंदन नयाल की पर्यावरण प्रेमी टीम में लगभग 200-300 युवा अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने जितना भी काम किया है अपने बलबूते पर किया है। उनका ना कोई NGO है, ना ही इस काम के लिए कोई फंडिंग है। वे बस युवाओं के सहयोग और जोश से ये काम कर रहे हैं।

चंदन नयाल पौधारोपण और उनके संरक्षण के साथ-साथ जंगलों में जल संरक्षण पर भी काम कर रहे हैं। इसके लिए वह जल कुंड और चाल-खाल बना रहे हैं। वे अपने गांव तोपचामा नें मिक्स फारेस्ट मॉडल पर काम कर रहे हैं, जिसमें चीड़ के जंगल के बीच छोटे छोटे जल कुंडों के साथ घास,पौधे, झाड़ियां, फलदार पेड़ लगा रहे हैं।

चंदन बताते हैं की उन्होंने अपने गांव तोपचामा में नर्सरी और बागवानी की भी शुरुआत की है, जो कि उनकी आजीविका का स्रोत है। उन्होंने बगीचों में आड़ू, पुलम और माल्टा के फलदार पेड़ लगाए हैं।

साथ ही चंदन ने ‘मेरा मित्र, मेरा पौधा’ एक अभियान भी चलाया है, जिसमें वे कुछ फलदार वृक्ष लोगों को मुफ्त में देते हैं। इसके पीछे का उद्देश्य गांव वालों को बागवानी करने के लिए जागरूक करना है, ताकि वह उनके लिए आय का एक स्रोत बन सके।

WeUttarakhand Team चंदन नयाल के इस जज़्बे को सलाम करता है।

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