Tilu Rauteli Awards: प्रदेश सरकार ने वीरांगना पुरस्कार की बढ़ाई धनराशि, बेटियों को मिलेंगे 51 हजार रुपये

pushkar singh dhami

Tilu Rauteli Awards: उत्तराखंड सरकार ने राज्य की वीरांगना तीलू रौतेली के नाम से दिए जाने वाले पुरस्कार की धनराशि 20 हजार रुपये बढ़ा दी है। साथ ही राज्य स्तरीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार की राशि में भी 30 हजार रुपये की वृद्धि कर दी है।

बता दें, उत्तराखंड सरकार ने राज्य की वीरांगना तीलू रौतेली के नाम से दिए जाने वाले पुरस्कार की धनराशि 20 हजार रुपये बढ़ा दी है। अब इसे 31 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपये कर दिया गया है। वहीं राज्य स्तरीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पुरस्कार की राशि में 30 हजार रुपये की वृद्धि कर दी गई है। अब इसे 21 हजार रुपये से बढ़ाकर 51 हजार रुपये कर दिया गया है।

वहीं आज मंगलवार 8 अगस्त को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदेश की 13 वीरांगनाओं को सम्मानित किया जाएगा।

कौन थी वीरांगना तीलू रौतेली

चौंदकोट गढ़वाल के गोर्ला रौत थोकदार और गढ़वाल रियासत के राजा फतेहशाह के सेनापति भूप्पू रावत की बेटी थी तीलू। जिसके दो बड़े भाई थे पत्वा और भक्तू। तीलू की सगाई बाल्यकाल में ही ईड़ गांव के सिपाही नेगी भवानी सिंह के साथ कर दी गई थी। साथ ही तीलू की सहेली बेला और देवकी की शादी भी तीलू के गांव गुराड में हुई थी। चौंदकोट में पति की बड़ी बहिन को ‘रौतेली’ संबोधित किया जाता है। बेला और देवकी भी तीलू को ‘तीलू रौतेली’ कहकर बुलाती थी। वीर भाइयों की छोटी बहिन तीलू बचपन से ही तलवार-ढाल के साथ खेलकर बड़ी हो रही थी। 15 वर्ष की होते-होते गुरु शिबू पोखरियाल ने तीलू को घुड़सवारी और तलवारबाजी के सारे गुर सिखा दिए थे।

बता दें, जब भी गढ़वाल में फसल काटी जाती थी तो वैसे ही कुमाऊं से कत्यूर सैनिक लूटपाट करने आ जाते थे और फसल के साथ-साथ अन्य सामान उठाकर ले जाते थे। ऐसे ही एक आक्रमण में तीलू के पिता, दोनों भाई और मंगेतर शहीद हो गए थे। इस भारी क्षति से तीलू की मां मैणा देवी को बहुत दुःख हुआ और उन्होंने तीलू को आदेश दिया कि वह नई सेना गठित करके कत्यूरों पर चढ़ाई करे और अपने भाइयों पिता और मंगेतर की मौत का बदला ले। जिसके बाद तीलू ने भी बदला लेने की ठान कर नई फौज गठित की।

उस वक्त तीलू की उम्र महज 15 साल थी और लगातार 7 वर्षों तक बड़ी चतुराई से तीलू ने रणनीति बनाकर कत्यूरों का सर्वनाश कर दिया। साथ ही तीलू की सहेली बेला और देवकी ने भी तीलू के साथ लड़ाई लड़ी। युद्व जीतने के बाद जब तीलू अपने गांव गुराड वापस आ रही थी, तो रात को पूर्वी नयार में स्नान करते समय कत्यूर सैनिक रामू रजवाड़ ने धोखे से तीलू की हत्या कर दी। वहीं युद्ध के दौरान कुमाऊं में जहां बेला शहीद हुई उस स्थान का नाम बेलाघाट और देवकी के शहीद स्थल को देघाट कहते हैं।

तीलू रौतेली पुरस्कार किसे दिया जाता है ?

उत्तराखंड सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को वीरबाला तीलू रौतेली के नाम पर प्रतिवर्ष वीरांगना तीलू रौतेली पुरस्कार दिया जाता है। प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड की वीरांगना तीलू रौतेली की जयंती पर वर्ष 2006 से इस पुरस्कार की शुरूआत की थी।

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