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एक शिक्षक ऐसा भी! खेल-खेल में और गीतों से गणित को बनाया सरल, पिछले 9 सालों से शत प्रतिशत रिजल्ट

Uttarakhand’s Teacher : सरकारी स्कूलों में कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जो अपने स्तर पर केवल शिक्षा का उजियारा ही नहीं फैला रहे बल्कि उन इलाकों के लिए एक मिसाल भी पेश कर रहे हैं, जहां अच्छी शिक्षा और अच्छे शिक्षक दोनों का ही अभाव है। पौड़ी के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक वीरेंद्र खंकरियाल पिछले 9 सालों से गणित जैसे जटील विषय को बच्चों के लिए रुचिकर बना रहे हैं।

खास बात तो यह है कि पिछले 9 सालों में उनके स्कूल के बच्चों का गणित का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। उनकी इस मेहनत और लगन के लिए उन्हें शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए भी चयनित किया गया है।वीरेंद्र खंकरियाल उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित पाबौ ब्लाक स्थित बुरांसी गांव के निवासी हैं। उनकी पहली नियुक्ति जुलाई 2002 में गणित के सहायक अध्यापक के पद पर जीआईसी कैलाश बांगर रुद्रप्रयाग में हुई थी।

Uttarakhand’s Teacher : 9 सालों से उनके स्कूल का गणित में परिणाम शत-प्रतिशत रहा

साल 2004 में उन्होंने गणित लैब स्थापना को लेकर एससीआरटी नरेंद्रनगर और एनसीआरटी अजमेर राजस्थान में कार्ययोजना प्रस्तुत की, जिसके बाद से राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में गणित लैब बनाने का कार्य शुरू हुआ।

वर्ष 2005 में कोट ब्लॉक में स्थित जीआइसी खोलाचौरी में उनका स्थांतरण हुआ। उन्होंने बताया कि लंबे समय से वे गणित विषय को खेल-खेल और गीतों के माध्यम से इसे छात्र-छात्राओं के लिए रुचिकर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने स्कूल में गणित की लैब भी बनाई है, जिससे कि गणित को सरल और प्रयोगात्मक दृष्टि से बच्चों को पढ़ाया जाए।

शिक्षक वीरेंद्र की इसी मेहनत और लगन के चलते पिछले 9 सालों से उनके स्कूल का गणित में परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में वीरेंद्र खंकरियाल जैसे शिक्षकों की सख्त जरूरत है, जो विद्यर्थियों के लिए जटिल से जटिल विषयों को सरल एवं रुचिकर बनाए और साथ ही शिक्षा को नए आयामों तक भी ले जाए।


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