1971 युद्ध के नायक Sam Manekshaw की बहादुरी की अनसुनी कहानियां

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 बर्मा में लड़ते हुए सैम मानेकशॉ को 7 गोलियां लगीं, लेकिन जज्बा ऐसा था कि मौत भी हार मान गई

  1947 में पाकिस्तानी घुसपैठियों को रोकने के लिए बहादुरी से लड़े और श्रीनगर को बचाया

  भारत-चीन युद्ध में सही रणनीति की सलाह दी, लेकिन अनदेखी हुई, फिर भी पूरी ताकत से डटे रहे

1965 में पाकिस्तान को करारा जवाब, पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब दिया और सेना को मजबूती से लीड किया

1971 की ऐतिहासिक जीत, उनकी शानदार रणनीति से बांग्लादेश आजाद हुआ, पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया

  प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी बिना डरे अपनी बात रखते थे, कभी समझौता नहीं किया

भारत के पहले फील्ड मार्शल, 1973 में उन्हें यह सम्मान मिला, उनकी वीरता और नेतृत्व हमेशा याद रहेंगे