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जानिए क्या है येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट? आखिर कब मौसम विभाग जारी करता है ये अलर्ट

मौसम से जुड़ी खबरें पढ़ते वक्त अक्सर आपको ऑरेंज, येलो और ग्रीन अलर्ट पढ़ने को मिलता होगा। मौसम विज्ञान केंद्र समय-समय पर मौसम की स्थिति बिगड़ने की संभावना को लेकर ये अलर्ट जारी करता है। इन अलर्ट को दर्शाने के लिए तीन रंगों का प्रयोग किया जाता है- येलो, ऑरेंज और रेड। हालांकि, मौसम विभाग इन तीन रंगों के साथ साथ मैप में ग्रीन रंग भी दर्शाता है, जिसका मतलब होता है ‘नो अलर्ट’। चलिए तो फिर आज जानते हैं येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट के बारे में:

करीब 12-13 साल पहले रंगों के आधार पर अलर्ट जारी करने की शुरुआत हुई थी। जिसे जल्द ही दुनिया के अधिकतर देशों के मौसम विभागों ने अपनाना शुरू कर दिया था। रंगों के माध्यम से अलर्ट जारी करने की इस प्रणाली से मौसम विभागों को चेतावनियों को आसानी से समझाने में मदद मिली। साथ ही रंगों पर आधारित होने के कारण इस प्रणाली का दुनिया भर में समान अर्थ निकलने की संभावनाएं भी बढ़ गई।

येलो अलर्ट (Yellow Alert)

येलो अलर्ट का मतलब होता है – खतरे के प्रति सचेत और अपडेटेड रहें। यह अलर्ट जस्ट वॉच का सिग्नल है, इसमें मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है और स्थिति बिगड़ने पर इसे ऑरेंज अलर्ट के रूप में अपडेट किया जाता है। मौसम विभाग का येलो अलर्ट जारी करने का मकसद होता है लोगों को सतर्क करना। मौसम की स्थिति बिगड़ने पर यह अक्सर जारी किया जाता है।

ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert)

ऑरेंज अलर्ट का मतलब होता है – खतरा, तैयार रहें। मौसम की स्थिति अधिक बिगड़ने पर विभाग येलो अलर्ट को अपडेट करके ऑरेंज अलर्ट कर दिया जाता है। मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट जारी करने का मकसद होता है की मौसम की स्थित में खतरा पैदा होने पर लोगों तैयार रहने के लिए सतर्क करना।

रेड अलर्ट (Red Alert)

रेड अलर्ट का मतलब होता है – खतरनाक स्थिति और जान-माल की सुरक्षा करने का समय आ गया है। यह अलर्ट तभी जारी किया जाता है जब मौसम बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है और इससे भारी नुकसान होने की संभावना होती है। इसलिए रेड अलर्ट अक्सर कम मौकों पर ही जारी किया जाता है।


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